मंगलवार, अगस्त 21"Satyam Vada, Dharmam Chara" - Taittiriya Upanishad

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धर्म और रिलीजन

धर्म और रिलीजन

Courtesy: Ashutosh Singh Thakur / Indiafacts.org धर्म क्या है? धर्म अपने मूल रूप में बहुत व्यापक अर्थ वाला है | एक सामान्य पारम्परिक हिन्दू से पूछेंगे तो इसके अनेक अर्थ मिलेंगे | मंदिर में आरती के पश्चात उद्घोष होता है – धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो! यहाँ धर्म का अर्थ क्या है? किसी एक रिलीजन की जय हो? नहीं | सत्य की जय हो, सदाचार की जय हो, आदर्श सिद्धांतों की जय हो | पापों का, बुराइयों का नाश हो | जब कहते हैं अमुक व्यक्ति बहुत धार्मिक है इसका अर्थ क्या हुआ? बहुत कट्टर मुसलमान है? इसका अर्थ हुआ कि वह भला है, सदाचारी है, परोपकारी है, ईमानदार है, सत्यवादी है इत्यादि | गोस्वामी तुलसीदास राम चरित मानस में लिखते हैं “परहित सरिस धरम नहीं भाई” मैथलीशरण गुप्त “जयद्रथ वध” में लिखते हैं – “अधिकार खो कर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है; न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है
भारत की मूलभुत मूल्य प्रणाली

भारत की मूलभुत मूल्य प्रणाली

भगवान की उदार आस्था भारत में जड़ में है। हिंदू धर्म की जड़ में 'ब्राह्मण' एक विचार है, जिसका अंग्रेजी में अनुवाद नहीं किया जा सकता है। ब्राह्मण विचार एक ऐसी विशिष्ट चेतना है जिसे हम सभी ब्रह्मांड में देखते हैं (और जो सभी अस्तित्व का कारण है)। इस विचार से ऋग्वेदिक संतो के लिए यह प्रचार करना आसान था - "सत्य एक है; साधु ‘इसे’ कई नामों से पुकारते हैं। दूसरे शब्दों में, "जैसे सभी नदियां सागर में जाती हैं, वैसे ही सभी धर्मों के निर्माता एक ही होते हैं" "एकम सत विप्रह बहुधा वदंती" : सत्य एक है, ऋषियों द्वारा इसे विभिन्न नाम दिया गया है। भारतीय संस्कृति का निर्माण, भारतीय सभ्यता की पूरी नींव पर आधारित मुख्य विषय है, इसके अंतहीन धर्म और संप्रदाय है । भारत इस "मूलभूत मूल्य" प्रणाली का समर्थन करता है, जिसे मैं अधिकांश भारतीयों द्वारा उनके धर्मों में देखता हूँ, विशेष रूप से इंडिक धर्मों में यह अ

जैन परंपरा से लिया गया एक गीत

ऐसा कोई दिव्य प्राणी नहीं हैं, जिसे मैं जानता हूं, या कोई भगवान भी नहीं है, न स्वर्ग है, और न ही नरक, न रक्षक है, न ही इस ब्रह्मांड का कोई मालिक, न निर्माता, न विनाशक , घटनाओं का केवल एक नियम है, मैं अपने कर्मों की जिम्मेदारी लेता हूं और उनके परिणामों की भी, प्राणियों के सबसे छोटे जीवों में भी जीवन शक्ति है मेरी ही तरह, मुझमें हमेशा इसी तरह करुणा हो सकती है, मैं किसी के भी, किसी भी तरह के नुकसान का कारण नहीं हो सकता, सच्चाई बहुआयामी है और उस तक पहुंचने के कई तरीके हैं, मुझे इस द्वंद्व में भी संतुलन मिल सकता है, मैं प्रार्थना करता हूं, मेरा अज्ञान नष्ट हो जाए, मेरी सच्ची आत्मा मुक्त हो, जीवन और मृत्यु के चक्र से, और मोक्ष प्राप्त करें! ~ "थेसियस का जहाज" से लिया गया गीत