गुरूवार, मई 23"Satyam Vada, Dharmam Chara" - Taittiriya Upanishad

टैग: हिन्दुत्व और ईसाई

धार्मिक ज्ञान को ग्रंथों के माध्यम से प्रसारित करने की आवश्यकता नहीं है

धार्मिक ज्ञान को ग्रंथों के माध्यम से प्रसारित करने की आवश्यकता नहीं है

https://www.youtube.com/watch?v=-tFbVwUqqlU&t=5s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 हम एक ऐसी सभ्यता हैं जिसके मूल में ज्ञान की बृहत् खोज करना है। हिन्दू धर्म जैसा कोई और धर्म नहीं है। यह ज्ञान परंपराओं की धारा का एक समूह है जिसमे आंतरिक और बाह्य दोनों दुनिया के ज्ञान की खोज चल रही है। वस्तुतः हम सदा से ऐसे ही थे जिसके अंतर्गत हम इन दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान में थे। इसलिए मौलिक रूप से हम ज्ञान परंपरायें हैं जो कई अलग-अलग तरीकों से प्रेषित होती हैं, क्योंकि ज्ञान को ग्रंथों के माध्यम से प्रसारित नहीं करना पड़ता है। आप अपने बेटे को साइकिल चलाना सिखाते हैं। क्या आप उसे इसके लिए किताब देते हैं? सीखने के विभिन्न तरीके हैं, ग्रंथ भी एक तरीका हो सकता है, लेकिन ग्रंथ ही एकमात्र तरीका नहीं है। और यह निश्चित रूप से प्रमुख तरीका नहीं है। आज भी मनुष्य मूलत: अवलोकन, पुनर
शिव आगम का अवतरण कैसे हुआ?

शिव आगम का अवतरण कैसे हुआ?

https://www.youtube.com/watch?v=3Tw4IaqZxeE&t=5s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 शिव आगम वे आगम हैं जो स्वयं महादेव द्वारा प्रकट किए गए थे। कामिका आगम, जो सबसे महत्वपूर्ण अगमों में से एक माना जाता है, में इसका वर्णन पाया जाता है। इसमें महादेव को पंचमुख के रूप में वर्णन किया गया है - सद्योजात, वामदेव, अघोरा, तद्पुरुष और ईशान। महादेव के इन चेहरों में से प्रत्येक में पांच और मुख थे। इन पाँच में से प्रत्येक मुख से लौकिक, वैदिक, आध्यात्मिक, अतिमार्ग और मंत्र आगम प्रकट हुए। ये केवल नाम नहीं हैं, बल्कि आगम की श्रेणियां हैं। इस प्रकार कुल 25 मुख बनते हैं। सद्योजात मुख से 24 रूपों वाला भूत तंत्र (उदाहरण - कौल तंत्र) प्रकट हुआ। वामदेव मुख से 24 रूपों वाला वामतंत्र प्रकट हुआ; अघोर मुख से भैरव तंत्र प्रकट हुआ; तत्पुरुष मुख से 24 रूपों वाला गरुड़ तंत्र और इशान मुख, जो सबसे महत्वपूर्ण है औ
इसाई पंथ और भारत – डॉ. सुरेन्द्र कुमार जैन का व्याख्यान

इसाई पंथ और भारत – डॉ. सुरेन्द्र कुमार जैन का व्याख्यान

संपूर्ण विश्व में प्रेम व शान्ति का स्वरुप माने जाने वाले इसाई धर्म के विस्तार का इतिहास रक्त से सना है, ये तथ्य कम ही लोग जानते हैं| यूनान, रोम व माया जैसी कई प्राचीन संस्कृतियाँ इसाई मिशनरियों के हाथों जड़ से मिटा दी गयीं| अनगिनत देशों की भोली-भाली प्रजा का जबरन धर्मान्तरण किया गया और जो न माने उन्हें अत्यंत बर्बरता से प्रताड़ित कर मौत के घाट उतार दिया गया| भारत में सर्वप्रथम इसाई शरणार्थी बन कर आये| परन्तु पुर्तगालियों के आगमन के साथ ‘गोवा इन्क्विज़िशन’ नामक क्रूरता का जो वीभत्स नरसंहार शुरू हुआ वो दिल दहलाने वाला था| उसके पश्चात् फ्रांसीसी, डच, अंग्रेज़, ये सभी विदेशी इसाई धर्म के विस्तार के लिए निर्दोष भारतवासियों पर अत्याचार करते रहे| अपने सृजन व्याख्यान “इसाई पंथ और भारत” में श्री सुरेन्द्र जैन बड़ी स्पष्टता से हमें अवगत कराते हैं कि किस प्रकार आज़ादी के पश्चात् इसाई मिशनरी छल-बल,
घर वापसी में रामानंद जी का योगदान

घर वापसी में रामानंद जी का योगदान

https://www.youtube.com/watch?v=KObhh12mrY0?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 जो लोग रामानंद को काटते हैं, जो लोग रामानंद से कबीर को अलग कर देते हैं, उनका पूरा agenda ही इसी line पर चलता हैं के, वे आपको ...आपके सामने कुछ ऐसा तर्क नहीं देंगे ऊल -जलूल type की बातें करेंगे I लेकिन रामानंद जी का योगदान बहुत ज़्यादा हैं इसलिए, क्योकि क्योकि आगे देखिये जो उन्होंने कार्य किया वह किसी और ने नहीं किया था I एक योद्धा संत का कार्य हैं I दरअसल उस समय जो समाज में...हम slide को आगे बढ़ाएंगे…प्रचलित जो था, कि हिन्दू जिसके गले पर तलवार रख दी जाती थी, वह तो मुसलमान बनने के लिए बाध्य था I उसके पास और कोई चारा नहीं था, या तो मर गया, कट गया या, जल गया या फिर क्या करेगा, मुसलमान ही बनेगे, उसके पास तो कोई चारा नहीं था I लाखों की तादात में धर्म परिवर्तन हुआ I धर्म परिवर्तन हुआ तो...लेकिन हिन्दू जो अप
धर्म और रिलीजन

धर्म और रिलीजन

Courtesy: Ashutosh Singh Thakur / Indiafacts.org धर्म क्या है? धर्म अपने मूल रूप में बहुत व्यापक अर्थ वाला है | एक सामान्य पारम्परिक हिन्दू से पूछेंगे तो इसके अनेक अर्थ मिलेंगे | मंदिर में आरती के पश्चात उद्घोष होता है – धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो! यहाँ धर्म का अर्थ क्या है? किसी एक रिलीजन की जय हो? नहीं | सत्य की जय हो, सदाचार की जय हो, आदर्श सिद्धांतों की जय हो | पापों का, बुराइयों का नाश हो | जब कहते हैं अमुक व्यक्ति बहुत धार्मिक है इसका अर्थ क्या हुआ? बहुत कट्टर मुसलमान है? इसका अर्थ हुआ कि वह भला है, सदाचारी है, परोपकारी है, ईमानदार है, सत्यवादी है इत्यादि | गोस्वामी तुलसीदास राम चरित मानस में लिखते हैं “परहित सरिस धरम नहीं भाई” मैथलीशरण गुप्त “जयद्रथ वध” में लिखते हैं – “अधिकार खो कर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है; न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है
काल भैरव कर्म – मृतकों की आत्म शान्ति के लिए

काल भैरव कर्म – मृतकों की आत्म शान्ति के लिए

Source: - Sadhguru Hindi YouTube Channel सद्‌गुरु हमें श्राद्ध के महत्व के बारे में बता रहे हैं। वे कहते हैं कि आखिरी समय या उसके 11 से 14 दिनों के बाद तक हमारे पास समय होता है कि हम उस जीव को इस तरह से स्पर्श कर सकते हैं कि उसमें मिठास भर जाती है। ऐसा करने के लिए ईशा योग केंद्र में काल भैरव शांति और काल भैरव कर्म प्रक्रियाएं भेंट की जाती हैं। https://www.youtube.com/watch?v=_LU3Rsmlm0I
गौतम बुद्ध के आत्मज्ञान की कहानी – बुद्ध पूर्णिमा. The Story of Gautam Buddha’s Awakening

गौतम बुद्ध के आत्मज्ञान की कहानी – बुद्ध पूर्णिमा. The Story of Gautam Buddha’s Awakening

Source: - Sadhguru Hindi YouTube Channel बुद्ध पूर्णिमा का क्या महत्व है? सिद्धार्थ गौतम एक बुद्ध कैसे बने? सद्‌‍गुरु गौतम बुद्ध के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना का वर्णन अपनी अंतर्दृष्टि के साथ कर रहे हैं। https://www.youtube.com/watch?v=a7eGsZ981P4

सतान / शैतान या भगवान / अल्लाह – कौन है शक्तिशाली ?

ईसाई धर्म में, शीर्षक शैतान (हिब्रू: - शैतान), "विरोधक", बाइबल में मनुष्यों की आस्था को चुनौती देने वाले मानवी और दिव्य दोनों प्रकार की विभिन्न संस्थाओं का एक शीर्षक है। "शैतान" बाद में बुराई के व्यक्तित्व का नाम बन गया। ईसाई परंपरा और धर्मशास्त्र ने "शैतान" को मनुष्य के विश्वास को परखने के लिए ईश्वर द्वारा नियुक्त किए गए एक अभियुक्त में बदल दिया। इस्लाम धर्म में में : "डेविल ", अरबी में "शैतान" (अरब ईसाई और मुस्लिमों द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द) । इबलीस को स्वयम पर गर्व था और वह खुद को आदम से बेहतर मानता था, क्योंकि आदम मिट्टी से बनी थी और इबलीस धुएं रहित आग से बनाया गया था। [2] इस अवज्ञा के कारण, भगवान ने उसे अनंत काल तक जहन्नुम में (नरक/यातनागृह )रहने का शाप दिया था। यह चौंकाने वाला है कि अधिकांश मुसलमान और ईसाई धर्मी एक शैतान या डेविल के होने में विश्वास रखते हैं। 'शैतान लोगों