रविवार, मार्च 24"Satyam Vada, Dharmam Chara" - Taittiriya Upanishad

विशिष्ट

आदी शंकर की परंपरा के कालक्रम को अंग्रेजों ने क्यों विकृत किया ?

आदी शंकर की परंपरा के कालक्रम को अंग्रेजों ने क्यों विकृत किया ?

https://www.youtube.com/watch?v=PgAT8WTSsaU?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 अंग्रेजों को मालूम था, कि जब-जब इतिहास की समीक्षा होगी तब-तब हमको Villan के रूप में देखा जायेगा I क्योकि हमने यहाँ पे इतने लूट-पाट कर लिए हैं, ऐसे-ऐसे नरसंहार किये हैं यहाँ पे, कि जब-जब इतिहास की समीक्षा होगी तब-तब हमको खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया जायेगा I अच्छा, अँगरेज़ यह भी जानतें थे कि इनकी विचारधारा का स्त्रोत क्या हैं? इनके ideology का स्त्रोत क्या हैं? कहाँ से ideology मिलती हैं, इनको ? यह लोग वोह लोग हैं ढाई हज़ार साल से दमन, शोषण, अत्याचार झेल रहें हैं ये, सांकृतिक लड़ाइयाँ लड़ रहे हैं यह लोग, वैचारिक युद्द, सांस्कृतिक युद्द, शस्त्र युद्द, उसके बाद भी समाप्त नहीं होती इनकी सभ्यता और संस्कृति फिर flourish करना चालु हो जातें हैं, यह फिर से जगत गुरु और विश्व गुरु हो जातें हैं, यह फिर से सोने की चिड़िया
भगवान् शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ

भगवान् शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ

https://www.youtube.com/watch?v=x2ko_RDhLFc?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 भगवान् शंकराचार्य जानते थे, कि उनके जाने के बाद भी, भारत के ऊपर शस्त्र युद्द, वैचारिक युद्द और सांस्कृतिक युद्द थोपे जायेंगे I जानते थे वोह इस बात को, इसीलिए, भगवान शंकराचार्य ने चार वेदों की रक्षा के लिए, भारत की चार दिशाओं में, चार आम्नाय मठो की स्थापना करी, आम्नाय का मतलब होता हैं, वेद I और आम्नाय पीठ का मतलब होता हैं वैदिक पीठ I तो चार आम्नाय पीठों की स्थापना करी भगवन शंकराचार्य ने, भारत की चार दिशाओं में I चार वेदों की रक्षा के लिए और चार धामों की रक्षा के लिए I भगवान् शंकराचार्य ने उत्तर दिशा में श्री उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ की स्थापना करी I और ज्योथिर्माथ का वेद जो हैं, वोह अथर्व वेद हैं, यानी जो ज्योतिर्मठ जो है, अथर्व वेद के जो सहिताएं हैं, जो ब्राह्मण ग्रन्थ हैं, जो आरण्यक ग्रन्थ हैं, जो उपनिषद्
भगवान् शंकराचार्य का अवतरण काल

भगवान् शंकराचार्य का अवतरण काल

https://www.youtube.com/watch?v=1_k8MRzuse8?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 पूरे facts और evidences के आधार पे हमारे पास तथ्य, प्रमाण, साक्ष और आंकड़े हैं जो यह बतातें हैं कि भगवन शंकराचार्य का अवतरण इसवी सन से ५०७ वर्ष पूर्व सिद्ध होता हैं I अब मैं आपको वोह timeline निकालके इसमें बताना चाहता हूँ, मैं आपको बता देता हूँ I भगवान् शंकराचार्य ने राजपीठ की जो स्थापना करी थी, उसके लिए उन्होंने, सम्राट सुधन्वा को अखंड भारत का राज सिंहासन समर्पित किया था, और सम्राट सुधन्वा की भूमिका जो हैं शंकर दिगविजय में, वोह कोई छोटी-मोटी भूमिका नहीं हैं I सम्राट सुधन्वा ने मेहती भूमिका निभाई हैं शंकर दिग विजय के अभियान में, भगवान् शंकराचार्य के I भगवान् शंकराचार्या के निजधाम, कैलाश गमन, जो कि ३२ वे वर्ष में सिद्ध होता हैं, भगवान् शंकराचार्य के निजधाम कैलाश गमन के एक माह पूर्व, यानी एक महीने पहले, सम्
भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

https://www.youtube.com/watch?v=T-pBRf9GU1g?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 छोटी सी आयु थी उनकी, जब घर छोड़ा था आठ वर्ष के थे वो I संन्यास के लिए निकले जब I नौ वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास लिया और उसके बाद में, भगवान् शंकराचार्य ने, वोह काम करके दिखाया, जो आज सोचा भी नहीं जा सकता हैं I भगवान् शंकराचार्य ने १२ वर्ष से १६ वर्ष कि आयु के बीच में, सोच सकतें हैं आप ? १२ साल का बच्चा कैसा हैं ? कितना मासूम रहता हैं. कितना कोमल रहता हैं वोह I १२ साल से १६ साल की आयु के बीच में भगवान् शंकराचार्य ने प्रस्थानात्रयी पे, प्रस्थानात्रयी I तीन तरह के प्रस्थान, ११ उपनिषदों पे भाष्य लिखा भगवान् शंकराचार्य I ब्रह्म सूत्र पे भाष्य लिकता हैं, भाद्रयाना महर्षि वेद व्यास कृत ब्रह सूत्र पे भाष्य लिखतें हैं, भगवान् शंकराचार्य I और श्रीमद भागवत पर भाष्य लिखतें हैं भगवान् शकाराचार्य I १२ वर्ष से १६ व
धर्म और रिलीजन

धर्म और रिलीजन

Courtesy: Ashutosh Singh Thakur / Indiafacts.org धर्म क्या है? धर्म अपने मूल रूप में बहुत व्यापक अर्थ वाला है | एक सामान्य पारम्परिक हिन्दू से पूछेंगे तो इसके अनेक अर्थ मिलेंगे | मंदिर में आरती के पश्चात उद्घोष होता है – धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो! यहाँ धर्म का अर्थ क्या है? किसी एक रिलीजन की जय हो? नहीं | सत्य की जय हो, सदाचार की जय हो, आदर्श सिद्धांतों की जय हो | पापों का, बुराइयों का नाश हो | जब कहते हैं अमुक व्यक्ति बहुत धार्मिक है इसका अर्थ क्या हुआ? बहुत कट्टर मुसलमान है? इसका अर्थ हुआ कि वह भला है, सदाचारी है, परोपकारी है, ईमानदार है, सत्यवादी है इत्यादि | गोस्वामी तुलसीदास राम चरित मानस में लिखते हैं “परहित सरिस धरम नहीं भाई” मैथलीशरण गुप्त “जयद्रथ वध” में लिखते हैं – “अधिकार खो कर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है; न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है
अपने गुरु को कैसे ढूँढें? How to Find Your Guru? [Hindi Dub]

अपने गुरु को कैसे ढूँढें? How to Find Your Guru? [Hindi Dub]

Source: - Sadhguru Hindi YouTube Channel सद्गुरु बताते हैं कि अगर आप मुक्ती चाहते हैं, सिर्फ तभी गुरु की तालाश महत्वपूर्ण है| अगर आप सांत्वना चाहते हैं, तो गुरु को न खोजें| लेकिन आप अपने गुरु को पहचानेंगे कैसे? इस विडियो में सद्गुरु अपने गुरु को पहचानने का तरीका भी बता रहे हैं| https://www.youtube.com/watch?v=0G-Nukg0uN8
सद्गुरु और ईशा योग केंद्र पर आस्था चैनल की डाक्यूमेंट्री – भाग 2

सद्गुरु और ईशा योग केंद्र पर आस्था चैनल की डाक्यूमेंट्री – भाग 2

Courtesy: - Sadhguru Hindi YouTube Channel पेश है अक्टूबर 2011 में आस्था चैनल द्वारा ईशा योग केंद्र और सद्गुरु पर बनाई हुई डाक्यूमेंट्री का दूसरा भाग। इस भाग में देखिए ईशा योग केन्द्र के विभिन्न शक्ति-केन्द्र और सद्गुरु के मार्गदर्शन में चल रही ईशा फ़ाउन्डेशन की विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं को। आइये, आप भी इस डाक्यूमेंट्री के माध्यम से ईशा योग केंद्र की यात्रा कीजिए... https://www.youtube.com/watch?v=bVMjQhW_7jU
नदी स्‍तुति | नदी अभियान गीत | भारतम् महाभारतम्

नदी स्‍तुति | नदी अभियान गीत | भारतम् महाभारतम्

Source: - Sadhguru Hindi YouTube Channel https://www.youtube.com/watch?v=BSmLlZLqeWY भारत की नदियों ने हज़ारों सालों से हमारा पोषण किया है, आज उनमें जल स्‍तर बड़ी तेजी से घटता जा रहा है। आजादी के बाद से, औसतन सभी प्रमुख नदियों का जलस्‍तर लगभग 40% तक घट गया है। इन नदियों ने हजारों सालों से हमें गले लगाया है और हमारा पालन-पोषण किया है। अब समय आ गया है कि हम नदियों को गले लगाएं और उनका पोषण करें। क्योंकि हमारे देश की महानता इसकी महान नदियों पर निर्भर करता है। भारतम् महाभारतम्, गंगा नर्मदा पुण्य तीर्थम्, सिंधु सरस्वती कावेरी, जीवन कारण मूल तत्वम्, नदी राष्ट्रस्य महाअमृतम्।। भारतम्।। अर्थ: भारत की पुण्‍य भूमि में गंगा, नर्मदा, सिंधु, सरस्‍वती, कावेरी जैसी कई नदियां बहती हैं। इन नदियों का जल पवित्र है। इन नदियों के किनारे ही हमारा देश फला-फूला है। हमने इन नदियों को जल