सोमवार, अगस्त 26"Satyam Vada, Dharmam Chara" - Taittiriya Upanishad

आदि शंकराचार्य

भारत को आदि शंकर का अभिनंदन क्यों करना चाहिए?

भारत को आदि शंकर का अभिनंदन क्यों करना चाहिए?

Source: - Swarjya Magazine. मनुष्य चिरकाल से ईश्वर को अपने हृदय में वास करने के लिए प्रार्थना करता आया है । परंतु आदि शंकराचार्य ने इसको ईश्वर के प्रति एक उपकार कहने का साहस किया । शंकराचार्य जयंती के उपलक्ष्य में जो कि पिछले सप्ताह बीती है आइए इस दर्शिनिक के विचारों के बारे में चिंतन करते हैं। शंकराचार्य एक प्रथम श्रेणी के कवि भी हैं जिनको संस्कृत के महान कवियों में गिना जाता है। पर सबसे महत्वपूर्ण यह है कि शंकराचार्य  एक आदर्श रूप हैं जिसमें सनातन धर्म का सार समाया हुआ है। उनकी कृतियाँ एक ओर एक स्वस्थ शंकावाद को दर्शित करती है तो वहीं वे अनुभव को विश्वास से अधिक प्राथमिकता देती हैं। वे धार्मिक ग्रंथो के अद्ध्ययन को ना तो आवश्यक मानते हैं ना ही सम्पूर्ण। वे  कर्मकांडों को स्थान तो देते हैं पर साथ ही उनकी सीमाओं के बारे में चेतावनी भी देते हैं। वे यह भी नहीं कहते की सिर्फ़ एक मार्ग ही
शंकराचार्य के बारे में जानना आवश्यक क्यों है ?

शंकराचार्य के बारे में जानना आवश्यक क्यों है ?

https://www.youtube.com/watch?v=rBySaPAfiJg?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 भगवान् शंकराचार्य को जानना अवतार परंपरा को जानना है, सनातन धर्म की I भगवान् शंकराचार्य को जानना , unity in diversity को जानना है I भगवान् शंकराचार्य को जानना national integration को जानना है, भगवान् शंकराचार्य को जानना social reform को जानना है, समाज सुधार को जानना है I भगवान् शंकराचर्या को जानना सनातन धर्म की पुनर संस्थापना को जानना है I ढाई हज़ार वर्ष से वर्त्तमान तक सतत, नित्य निरंतर, अनवरत रूप से सनातन धर्म के प्रशस्थ मानबिन्दुओं की रक्षा करने का श्रेय अगर किसी को जाता हैं, तो वह जाता है शंकराचार्य परंपरा को I शंकराचार्य परंपरा अगर न होती, भगवान् शंकराचार्य का अवतार न हुआ होता तो, इन ढाई हज़ार वर्षों में सनातन धर्म की क्या दुर्गति हुई होती यह समझा जा सकता है I १७ बार invasion होते हैं हम पे I १७ ब
आदी शंकर की परंपरा के कालक्रम को अंग्रेजों ने क्यों विकृत किया ?

आदी शंकर की परंपरा के कालक्रम को अंग्रेजों ने क्यों विकृत किया ?

https://www.youtube.com/watch?v=PgAT8WTSsaU?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 अंग्रेजों को मालूम था, कि जब-जब इतिहास की समीक्षा होगी तब-तब हमको Villan के रूप में देखा जायेगा I क्योकि हमने यहाँ पे इतने लूट-पाट कर लिए हैं, ऐसे-ऐसे नरसंहार किये हैं यहाँ पे, कि जब-जब इतिहास की समीक्षा होगी तब-तब हमको खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया जायेगा I अच्छा, अँगरेज़ यह भी जानतें थे कि इनकी विचारधारा का स्त्रोत क्या हैं? इनके ideology का स्त्रोत क्या हैं? कहाँ से ideology मिलती हैं, इनको ? यह लोग वोह लोग हैं ढाई हज़ार साल से दमन, शोषण, अत्याचार झेल रहें हैं ये, सांकृतिक लड़ाइयाँ लड़ रहे हैं यह लोग, वैचारिक युद्द, सांस्कृतिक युद्द, शस्त्र युद्द, उसके बाद भी समाप्त नहीं होती इनकी सभ्यता और संस्कृति फिर flourish करना चालु हो जातें हैं, यह फिर से जगत गुरु और विश्व गुरु हो जातें हैं, यह फिर से सोने की चिड़िया
भगवान् शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ

भगवान् शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ

https://www.youtube.com/watch?v=x2ko_RDhLFc?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 भगवान् शंकराचार्य जानते थे, कि उनके जाने के बाद भी, भारत के ऊपर शस्त्र युद्द, वैचारिक युद्द और सांस्कृतिक युद्द थोपे जायेंगे I जानते थे वोह इस बात को, इसीलिए, भगवान शंकराचार्य ने चार वेदों की रक्षा के लिए, भारत की चार दिशाओं में, चार आम्नाय मठो की स्थापना करी, आम्नाय का मतलब होता हैं, वेद I और आम्नाय पीठ का मतलब होता हैं वैदिक पीठ I तो चार आम्नाय पीठों की स्थापना करी भगवन शंकराचार्य ने, भारत की चार दिशाओं में I चार वेदों की रक्षा के लिए और चार धामों की रक्षा के लिए I भगवान् शंकराचार्य ने उत्तर दिशा में श्री उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ की स्थापना करी I और ज्योथिर्माथ का वेद जो हैं, वोह अथर्व वेद हैं, यानी जो ज्योतिर्मठ जो है, अथर्व वेद के जो सहिताएं हैं, जो ब्राह्मण ग्रन्थ हैं, जो आरण्यक ग्रन्थ हैं, जो उपनिषद्
भगवान् शंकराचार्य का अवतरण काल

भगवान् शंकराचार्य का अवतरण काल

https://www.youtube.com/watch?v=1_k8MRzuse8?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 पूरे facts और evidences के आधार पे हमारे पास तथ्य, प्रमाण, साक्ष और आंकड़े हैं जो यह बतातें हैं कि भगवन शंकराचार्य का अवतरण इसवी सन से ५०७ वर्ष पूर्व सिद्ध होता हैं I अब मैं आपको वोह timeline निकालके इसमें बताना चाहता हूँ, मैं आपको बता देता हूँ I भगवान् शंकराचार्य ने राजपीठ की जो स्थापना करी थी, उसके लिए उन्होंने, सम्राट सुधन्वा को अखंड भारत का राज सिंहासन समर्पित किया था, और सम्राट सुधन्वा की भूमिका जो हैं शंकर दिगविजय में, वोह कोई छोटी-मोटी भूमिका नहीं हैं I सम्राट सुधन्वा ने मेहती भूमिका निभाई हैं शंकर दिग विजय के अभियान में, भगवान् शंकराचार्य के I भगवान् शंकराचार्या के निजधाम, कैलाश गमन, जो कि ३२ वे वर्ष में सिद्ध होता हैं, भगवान् शंकराचार्य के निजधाम कैलाश गमन के एक माह पूर्व, यानी एक महीने पहले, सम्
भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

https://www.youtube.com/watch?v=T-pBRf9GU1g?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 छोटी सी आयु थी उनकी, जब घर छोड़ा था आठ वर्ष के थे वो I संन्यास के लिए निकले जब I नौ वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास लिया और उसके बाद में, भगवान् शंकराचार्य ने, वोह काम करके दिखाया, जो आज सोचा भी नहीं जा सकता हैं I भगवान् शंकराचार्य ने १२ वर्ष से १६ वर्ष कि आयु के बीच में, सोच सकतें हैं आप ? १२ साल का बच्चा कैसा हैं ? कितना मासूम रहता हैं. कितना कोमल रहता हैं वोह I १२ साल से १६ साल की आयु के बीच में भगवान् शंकराचार्य ने प्रस्थानात्रयी पे, प्रस्थानात्रयी I तीन तरह के प्रस्थान, ११ उपनिषदों पे भाष्य लिखा भगवान् शंकराचार्य I ब्रह्म सूत्र पे भाष्य लिकता हैं, भाद्रयाना महर्षि वेद व्यास कृत ब्रह सूत्र पे भाष्य लिखतें हैं, भगवान् शंकराचार्य I और श्रीमद भागवत पर भाष्य लिखतें हैं भगवान् शकाराचार्य I १२ वर्ष से १६ व