सृष्टि का आदि और अन्त | नीरज अत्रि | पैगंबरवाद का पूर्व पक्ष | Neeraj Atri

जो प्राकृतिक वाले हैं,  उनका कहना है कि सृस्टि का ना तो कोई आदि है ना कोई अंत है। हमेशा से थी और हमेशा चलती रहेगी। जो…

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सत्य से सरोकार: देखें और अनुभव करें बनाम यह जानने योग्य नहीं है |नीरज अत्रि |पैगंबरवाद का पूर्व पक्ष

‘नेचर ऑफ़ टरूथ’, हर किसी आइडियोलॉजी का ये क्लेम होता है की सच उनके पास है या उनको पता है दूसरे को नहीं पता। ये किसी भी…

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प्राकृतिक बनाम अब्राहमिक धर्म: अच्छे और बुरे इंसान में भेद का सिद्धांत | नीरज अत्रि |Niraj Atri | पैगंबरवाद का पूर्व पक्ष

सबसे पहला जो आस्पेक्ट है पैगंबरवाद का, वो पूरी की पूरीह्यूमैनिटी को दो कैटागोरिस मैं डिवाइड करता है। वो उनकीटर्मिनोलॉजी अलग हो सकती है, ले

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अब्राहमिक धर्मों की अन्य के प्रति शत्रुता क्यों? | नीरज अत्रि | Niraj Atri | Exclusivism Of Abrahamic Religions

जो ये पैगम्बरवाद है जिसे हम प्रॉफेटिज़्म कहते हैं, इन्होंने गॉड को भी आदराइज़ किया हुआ है कि गॉड भी अदर है। अब ये हमारे…

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भारतीय गुरुओं की आंतरिक इंजीनियरिंग और यह पश्चिमी दृष्टिकोण से कैसे भिन्न है

Translation Credit: Sateesh Javali. जब आप इस तरह का विश्लेषण कर रहे होते हैं, तो बहुत सारा सामान चल रहा होता है, उदाहरण के लिए,…

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क्या डेसकार्टेस के अनुसार मन और शरीर पूरी तरह से अलग हैं | व्यक्ति-निष्ठ तंत्रिका विज्ञान |योगिक तंत्रिका विज्ञान

Translation Credit: – Sateesh Javali. तो, मानक दृष्टिकोण और पश्चिमी विचार हमेशा कहते हैं कि मन शरीर से स्वतंत्र है। यह रेने डेसकार्टेस है। इसलिए…

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सनातन और पैगम्बरवाद में पाप की धारणा | नीरज अत्रि | The Concept Of Sin | Neeraj Atri

मनुष्य की स्थिति क्या है? (मनुष्य दो तरह के हैं – प्राकृतिक तथा पैगम्बरवादी) जिसमे की दोनों तरह के लोगो का दावा एक दूसरे का…

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शिव आगम का अवतरण कैसे हुआ?

शिव आगम वे आगम हैं जो स्वयं महादेव द्वारा प्रकट किए गए थे। कामिका आगम, जो सबसे महत्वपूर्ण अगमों में से एक माना जाता है,…

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संत रैदास जी को जब इस्लाम को अपनाने को कहा गया

संत रैदास जी का एक यह हैं, जब उनको दबाव डाला गया कि तुम इस्लाम क़ुबूल करो तो उन्होंने लिखा :- वेद धरम सबसे बड़ा…

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रामानंदाचार्य ब्राह्मण वादी नहीं थे

स्वामी रामानंद ने “वैष्णव मताब्ज भास्कर” में लिखा हैं : प्राप्तम पराम सिद्धधर्मकिंचनो जानो द्विजातिरछां शरणम हरीम व्रजेत परम दयालु स्वगुणानपेक्षित क्रियाकलापादिक जाती बन्धनं सिद्धि…

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