शनिवार, सितम्बर 21"Satyam Vada, Dharmam Chara" - Taittiriya Upanishad

आध्यात्मिक परम्पराएं

भारत को आदि शंकर का अभिनंदन क्यों करना चाहिए?

भारत को आदि शंकर का अभिनंदन क्यों करना चाहिए?

Source: - Swarjya Magazine. मनुष्य चिरकाल से ईश्वर को अपने हृदय में वास करने के लिए प्रार्थना करता आया है । परंतु आदि शंकराचार्य ने इसको ईश्वर के प्रति एक उपकार कहने का साहस किया । शंकराचार्य जयंती के उपलक्ष्य में जो कि पिछले सप्ताह बीती है आइए इस दर्शिनिक के विचारों के बारे में चिंतन करते हैं। शंकराचार्य एक प्रथम श्रेणी के कवि भी हैं जिनको संस्कृत के महान कवियों में गिना जाता है। पर सबसे महत्वपूर्ण यह है कि शंकराचार्य  एक आदर्श रूप हैं जिसमें सनातन धर्म का सार समाया हुआ है। उनकी कृतियाँ एक ओर एक स्वस्थ शंकावाद को दर्शित करती है तो वहीं वे अनुभव को विश्वास से अधिक प्राथमिकता देती हैं। वे धार्मिक ग्रंथो के अद्ध्ययन को ना तो आवश्यक मानते हैं ना ही सम्पूर्ण। वे  कर्मकांडों को स्थान तो देते हैं पर साथ ही उनकी सीमाओं के बारे में चेतावनी भी देते हैं। वे यह भी नहीं कहते की सिर्फ़ एक मार्ग ही
शिव आगम का अवतरण कैसे हुआ?

शिव आगम का अवतरण कैसे हुआ?

https://www.youtube.com/watch?v=3Tw4IaqZxeE&t=5s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 शिव आगम वे आगम हैं जो स्वयं महादेव द्वारा प्रकट किए गए थे। कामिका आगम, जो सबसे महत्वपूर्ण अगमों में से एक माना जाता है, में इसका वर्णन पाया जाता है। इसमें महादेव को पंचमुख के रूप में वर्णन किया गया है - सद्योजात, वामदेव, अघोरा, तद्पुरुष और ईशान। महादेव के इन चेहरों में से प्रत्येक में पांच और मुख थे। इन पाँच में से प्रत्येक मुख से लौकिक, वैदिक, आध्यात्मिक, अतिमार्ग और मंत्र आगम प्रकट हुए। ये केवल नाम नहीं हैं, बल्कि आगम की श्रेणियां हैं। इस प्रकार कुल 25 मुख बनते हैं। सद्योजात मुख से 24 रूपों वाला भूत तंत्र (उदाहरण - कौल तंत्र) प्रकट हुआ। वामदेव मुख से 24 रूपों वाला वामतंत्र प्रकट हुआ; अघोर मुख से भैरव तंत्र प्रकट हुआ; तत्पुरुष मुख से 24 रूपों वाला गरुड़ तंत्र और इशान मुख, जो सबसे महत्वपूर्ण है औ
शंकराचार्य के बारे में जानना आवश्यक क्यों है ?

शंकराचार्य के बारे में जानना आवश्यक क्यों है ?

https://www.youtube.com/watch?v=rBySaPAfiJg?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 भगवान् शंकराचार्य को जानना अवतार परंपरा को जानना है, सनातन धर्म की I भगवान् शंकराचार्य को जानना , unity in diversity को जानना है I भगवान् शंकराचार्य को जानना national integration को जानना है, भगवान् शंकराचार्य को जानना social reform को जानना है, समाज सुधार को जानना है I भगवान् शंकराचर्या को जानना सनातन धर्म की पुनर संस्थापना को जानना है I ढाई हज़ार वर्ष से वर्त्तमान तक सतत, नित्य निरंतर, अनवरत रूप से सनातन धर्म के प्रशस्थ मानबिन्दुओं की रक्षा करने का श्रेय अगर किसी को जाता हैं, तो वह जाता है शंकराचार्य परंपरा को I शंकराचार्य परंपरा अगर न होती, भगवान् शंकराचार्य का अवतार न हुआ होता तो, इन ढाई हज़ार वर्षों में सनातन धर्म की क्या दुर्गति हुई होती यह समझा जा सकता है I १७ बार invasion होते हैं हम पे I १७ ब
भगवान् शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ

भगवान् शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ

https://www.youtube.com/watch?v=x2ko_RDhLFc?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 भगवान् शंकराचार्य जानते थे, कि उनके जाने के बाद भी, भारत के ऊपर शस्त्र युद्द, वैचारिक युद्द और सांस्कृतिक युद्द थोपे जायेंगे I जानते थे वोह इस बात को, इसीलिए, भगवान शंकराचार्य ने चार वेदों की रक्षा के लिए, भारत की चार दिशाओं में, चार आम्नाय मठो की स्थापना करी, आम्नाय का मतलब होता हैं, वेद I और आम्नाय पीठ का मतलब होता हैं वैदिक पीठ I तो चार आम्नाय पीठों की स्थापना करी भगवन शंकराचार्य ने, भारत की चार दिशाओं में I चार वेदों की रक्षा के लिए और चार धामों की रक्षा के लिए I भगवान् शंकराचार्य ने उत्तर दिशा में श्री उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ की स्थापना करी I और ज्योथिर्माथ का वेद जो हैं, वोह अथर्व वेद हैं, यानी जो ज्योतिर्मठ जो है, अथर्व वेद के जो सहिताएं हैं, जो ब्राह्मण ग्रन्थ हैं, जो आरण्यक ग्रन्थ हैं, जो उपनिषद्
भगवान् शंकराचार्य का अवतरण काल

भगवान् शंकराचार्य का अवतरण काल

https://www.youtube.com/watch?v=1_k8MRzuse8?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 पूरे facts और evidences के आधार पे हमारे पास तथ्य, प्रमाण, साक्ष और आंकड़े हैं जो यह बतातें हैं कि भगवन शंकराचार्य का अवतरण इसवी सन से ५०७ वर्ष पूर्व सिद्ध होता हैं I अब मैं आपको वोह timeline निकालके इसमें बताना चाहता हूँ, मैं आपको बता देता हूँ I भगवान् शंकराचार्य ने राजपीठ की जो स्थापना करी थी, उसके लिए उन्होंने, सम्राट सुधन्वा को अखंड भारत का राज सिंहासन समर्पित किया था, और सम्राट सुधन्वा की भूमिका जो हैं शंकर दिगविजय में, वोह कोई छोटी-मोटी भूमिका नहीं हैं I सम्राट सुधन्वा ने मेहती भूमिका निभाई हैं शंकर दिग विजय के अभियान में, भगवान् शंकराचार्य के I भगवान् शंकराचार्या के निजधाम, कैलाश गमन, जो कि ३२ वे वर्ष में सिद्ध होता हैं, भगवान् शंकराचार्य के निजधाम कैलाश गमन के एक माह पूर्व, यानी एक महीने पहले, सम्
भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

https://www.youtube.com/watch?v=T-pBRf9GU1g?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 छोटी सी आयु थी उनकी, जब घर छोड़ा था आठ वर्ष के थे वो I संन्यास के लिए निकले जब I नौ वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास लिया और उसके बाद में, भगवान् शंकराचार्य ने, वोह काम करके दिखाया, जो आज सोचा भी नहीं जा सकता हैं I भगवान् शंकराचार्य ने १२ वर्ष से १६ वर्ष कि आयु के बीच में, सोच सकतें हैं आप ? १२ साल का बच्चा कैसा हैं ? कितना मासूम रहता हैं. कितना कोमल रहता हैं वोह I १२ साल से १६ साल की आयु के बीच में भगवान् शंकराचार्य ने प्रस्थानात्रयी पे, प्रस्थानात्रयी I तीन तरह के प्रस्थान, ११ उपनिषदों पे भाष्य लिखा भगवान् शंकराचार्य I ब्रह्म सूत्र पे भाष्य लिकता हैं, भाद्रयाना महर्षि वेद व्यास कृत ब्रह सूत्र पे भाष्य लिखतें हैं, भगवान् शंकराचार्य I और श्रीमद भागवत पर भाष्य लिखतें हैं भगवान् शकाराचार्य I १२ वर्ष से १६ व
धर्म और रिलीजन

धर्म और रिलीजन

Courtesy: Ashutosh Singh Thakur / Indiafacts.org धर्म क्या है? धर्म अपने मूल रूप में बहुत व्यापक अर्थ वाला है | एक सामान्य पारम्परिक हिन्दू से पूछेंगे तो इसके अनेक अर्थ मिलेंगे | मंदिर में आरती के पश्चात उद्घोष होता है – धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो! यहाँ धर्म का अर्थ क्या है? किसी एक रिलीजन की जय हो? नहीं | सत्य की जय हो, सदाचार की जय हो, आदर्श सिद्धांतों की जय हो | पापों का, बुराइयों का नाश हो | जब कहते हैं अमुक व्यक्ति बहुत धार्मिक है इसका अर्थ क्या हुआ? बहुत कट्टर मुसलमान है? इसका अर्थ हुआ कि वह भला है, सदाचारी है, परोपकारी है, ईमानदार है, सत्यवादी है इत्यादि | गोस्वामी तुलसीदास राम चरित मानस में लिखते हैं “परहित सरिस धरम नहीं भाई” मैथलीशरण गुप्त “जयद्रथ वध” में लिखते हैं – “अधिकार खो कर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है; न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है
सद्गुरु और ईशा योग केंद्र पर आस्था चैनल की डाक्यूमेंट्री – भाग 2

सद्गुरु और ईशा योग केंद्र पर आस्था चैनल की डाक्यूमेंट्री – भाग 2

Courtesy: - Sadhguru Hindi YouTube Channel पेश है अक्टूबर 2011 में आस्था चैनल द्वारा ईशा योग केंद्र और सद्गुरु पर बनाई हुई डाक्यूमेंट्री का दूसरा भाग। इस भाग में देखिए ईशा योग केन्द्र के विभिन्न शक्ति-केन्द्र और सद्गुरु के मार्गदर्शन में चल रही ईशा फ़ाउन्डेशन की विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं को। आइये, आप भी इस डाक्यूमेंट्री के माध्यम से ईशा योग केंद्र की यात्रा कीजिए... https://www.youtube.com/watch?v=bVMjQhW_7jU