शुक्रवार, नवम्बर 16"Satyam Vada, Dharmam Chara" - Taittiriya Upanishad

भगवान् शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ

भगवान् शंकराचार्य जानते थे, कि उनके जाने के बाद भी, भारत के ऊपर शस्त्र युद्द, वैचारिक युद्द और सांस्कृतिक युद्द थोपे जायेंगे I जानते थे वोह इस बात को, इसीलिए, भगवान शंकराचार्य ने चार वेदों की रक्षा के लिए, भारत की चार दिशाओं में, चार आम्नाय मठो की स्थापना करी, आम्नाय का मतलब होता हैं, वेद I और आम्नाय पीठ का मतलब होता हैं वैदिक पीठ I तो चार आम्नाय पीठों की स्थापना करी भगवन शंकराचार्य ने, भारत की चार दिशाओं में I चार वेदों की रक्षा के लिए और चार धामों की रक्षा के लिए I

भगवान् शंकराचार्य ने उत्तर दिशा में श्री उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ की स्थापना करी I और ज्योथिर्माथ का वेद जो हैं, वोह अथर्व वेद हैं, यानी जो ज्योतिर्मठ जो है, अथर्व वेद के जो सहिताएं हैं, जो ब्राह्मण ग्रन्थ हैं, जो आरण्यक ग्रन्थ हैं, जो उपनिषद् हैं, उनकी रक्षा करेगा I यह दायित्व दिया भगवन शंकराचार्य ने उत्तराम्नाया ज्योतिर्मठ को I उसके बाद भगवान् शंकराचार्य ने बद्रिकशार्म में स्थापना करी, जोशी मुट्ठ भी कहतें हैं जिसको हम I उसके बाद में द्वारका में, भगवान् शंकराचार्य ने, श्री द्वारका कालिका शारदा माथा की स्थापना की I सामवेदीय, पस्चिमाम्नाय श्री द्वारा शारदा कालिका मठ I और उसे सामवेद की रक्षा का दायित्व सौंपा, भगवान् शंकराचार्य ने I

उसके बाद भगवान् शंकराचार्य, भारत की पूर्व दिशा में श्री रिग्वेदिया पूर्वाम्नाय गोवर्धन पूरी मठ की स्थापना करतें हैं I रिग वेदिय पूर्वाम्नाय, नाम से ही मालूम पद रहा हैं न, रिग वेदिय मठ हैं I रिग वेद की रक्षा करेगा, गोवर्धन मठ I रिग वेद की शाखाओं की, रिग वेद का ब्राह्मण ग्रन्थ, आरण्यको की, उप वेद की रक्षा करेगा गोवर्धन मठ I और उपनिषदों की रक्षा करेगा, रिग वेद के अंतर्गत जो आतें हैं I उसके बाद दक्षिण में भगवान् शंकराचार्य ने यजुर वेदिय दक्शिनाम्नाय श्रृंगेरी मठ की स्थापना करी I

और श्रृंगेरी मठ को यजुर वेद प्रदान करा I यजुर वेद की रक्षा का दावित्व श्री श्रृंगेरी मठ को दिया भगवान् शंकराचार्य ने, और ऐसा नहीं हैं, कि केवल मठ बना दिए भगवान् शंकराचार्य ने, और वेदों की रक्षा का दावित्व दिया, नहीं, वैज्ञानिक  रूप से, दार्शनिक रूप से, व्यवहारिक, वैज्ञानिक, सैद्धांतिक और सांस्कृतिक रूप से भगवान् शंकराचार्य ने इन चार आम्नाय मठों की स्थापना करी थी, योग-शिखो उपनिषद् के अनुसार I

और छान्दोग्य उपनिषद् के तृतीय अध्याय में, जो मधु विद्या का वर्णन आता हैं, उस मधु विद्या के अनुसार भगवान् शंकराचार्य ने भारत की चार दिशाओं में चार आम्नाय पीठों की स्थापना करी और वहां पे चार वेदों को प्रथिश्थित किया, क्रम से I साथ ही साथ इन मठों के समस्त प्रकार के तीर्थों का, आराध्य देव, अधिष्टात्री देवी, गोत्र, वेद, सम्प्रदाय और सन्यासी, ब्रह्मचार्यों का निर्धारण करा, भगवान् भगवन शंकराचार्य ने I

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