शनिवार, जुलाई 21"Satyam Vada, Dharmam Chara" - Taittiriya Upanishad

आदी शंकर की परंपरा के कालक्रम को अंग्रेजों ने क्यों विकृत किया ?

अंग्रेजों को मालूम था, कि जब-जब इतिहास की समीक्षा होगी तब-तब हमको Villan के रूप में देखा जायेगा I क्योकि हमने यहाँ पे इतने लूट-पाट कर लिए हैं, ऐसे-ऐसे नरसंहार किये हैं यहाँ पे, कि जब-जब इतिहास की समीक्षा होगी तब-तब हमको खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया जायेगा I अच्छा, अँगरेज़ यह भी जानतें थे कि इनकी विचारधारा का स्त्रोत क्या हैं? इनके ideology का स्त्रोत क्या हैं? कहाँ से ideology मिलती हैं, इनको ? यह लोग वोह लोग हैं ढाई हज़ार साल से दमन, शोषण, अत्याचार झेल रहें हैं ये, सांकृतिक लड़ाइयाँ लड़ रहे हैं यह लोग, वैचारिक युद्द, सांस्कृतिक युद्द, शस्त्र युद्द, उसके बाद भी समाप्त नहीं होती इनकी सभ्यता और संस्कृति फिर flourish करना चालु हो जातें हैं, यह फिर से जगत गुरु और विश्व गुरु हो जातें हैं, यह फिर से सोने की चिड़िया बन जातें हैं, आर्थिक महाशक्ति बन जातें हैं ये फिर से यहाँ पे फिर से धर्म-राज्य की स्थापना हो जाती हैं यहाँ पे, फिर से सेवा के प्रकल्प चालु हो जातें हैं, और तो और invaders के साथ फिर से इनकी communal harmony establish हो जाती हैं I इनको कैसे समाप्त करें ? तो इन्होने कहा, अंग्रेजों ने, कि इनकी विचारधारा जहाँ से आ रही हैं, उसको विकृत, उर दूषित करों और इनकी विचारधारा का स्त्रोत जो हैं सर्वोच्च और सार्वभौम धर्म गुण, शंकराचार्य परंपरा I तो भगवन शंकराचार्य की वोह परंपरा जिसके अनुसार इसवी सन से ५०७ वर्ष पूर्व भगवान् शंकराचार्य का अवतार हुआ था I अंग्रेजों ने उस अवतार को, भगवान् शंकराचार्य के उस अवतरण काल को ७८८ में लाके रख दिया I

उन्होंने कहा २५० हज़ार वर्ष पूर्व सिद्द हो गए शंकराचार्य, भगवान् का अवतरण सिद्द हो गया तो हमारी aryan invasion theory गलत सिद्द हो जायेगी I हमको, इनको, इनको मतलब सनातन धर्मियों को, इस देश में बहार से आया हुआ सिद्द करना हैं, कि तुम्हारे पूर्वज बहार से आये थे I आर्य जो हैं वोह central Asia से आये थे I तुम Aryan race हो, Max Muller ने सबसे पहले कहाँ था, कि तुम Aryan race हो I तो चुकी हम भी इस देश में बहार से आये, और हमने दमन, शोषण, अत्याचार, उत्पीडन किया, यानि अंग्रेजों ने, तो अंग्रेजों ने यही सोचा कि ठीक हैं इनको बहार से आया हुआ सिद्द कर दो I और उस वक्त हिटलर जो हैं, वोह अपने ध्वज पर स्वतिक का निशान बना के घूम भी रहा था, वोह अपने आप को आर्य, आर्य, आर्य.. चिल्ला ही रहा था, तो उन्होंने कहा कि चलो इनका connection अपन उनसे जोड़ते हैं, और इनको बहार से आया हुआ सिद्ध करते हैं अपन I

और साथ ही साथ इनकी जो शंकराचार्य परंपरा हैं उसको अपन ७८८ का सिद्द कर देते हैं I कि इनका अवतरण जो हैं इस काल खंड में हुआ हैं I इससे हमारी aryan invasion theory सत्य सिद्द हो जायेगी I वरना अगर ये २५० हज़र वर्ष पूर्व के सिद्द हो गए तो हम कैसे सिद्द करेंगे कि हां, आर्य भारत में बहार से नहीं आये थे ? तो हमारी, अच्छा फिर १८३५ में resolution लाता हैं McCauley, Educational Resolution लाता हैं वो, और इंग्लिश को Official language का दर्जा दिलवाता हैं वो I पर्शियन और संस्कृत को पूरी तरह निरस्त करता हैं और अच्छा उसका quote भी हैं, २ फेब्रुअरी १८३५ को दिया था, “I have travelled across the length and breath of this country and I have ot seen a single person who is beggar and thief. Such wealth I have seen in this country that I think we would never conquer this nation unless and until we break the very backbone of this nation which is her spiritual and cultural and educational heritage. So if the Indians think, that whatever is foreign, whatever things which belongs to foreign or West is greater than us then they will loose their self-esteem, then they will become what we want them, a truley dominated nation.”

कहता हैं मैंने भारत को घूम लिया हैं पूरा, मुझे कोई चोर नहीं मिलता, भिकारी नहीं मिलता यहाँ पे, “such wealth I have seen in this country” इतना अकूत सम्पदा देखी हैं मैंने इस देश में, मुझे नहीं लगता कि हम लोग इस देश पे राज कर पाएंगे I लेकिन हमको इनके cultural heritage को, educational heritage को बदलना पड़ेगा, इनके educational system को बदलना पड़ेगा I जिस दिन भारतीयों को लग गया कि जो कुछ भी विदेशी हैं, वोह हमसे अधिक श्रेष्ठ हैं, उस दिन यह लोग अपना आत्मा-गौरव अपना आत्मा-सम्मान खो देंगे, उस दिन यह लोग हमारे मानसिक घुलाम बनेंगे I और उस दिन भारत का पतन होगा I तो educational system भी तो बदलना था हमारे यहाँ I हमारी गुरुकल शिक्षा पद्धति जो चली आ रही थी उसको change किया गया और जो नयी शिक्षा व्यवस्था दी गयी थी, उसमे हमारे आचार्य, ऋषि, मुनि, हमारे रामायण, हमारे भागवत, हमारे अवतारों को सबको कपौल-कल्पना सिद्ध कर दिया गया I बोले यह कल्पना है तुम्हारी I Fiction है यह सब, और यह क्या है यह, तुम सब लोग इस तरह की चीजों में believe करतें हो ? अवतार होता है ? हजारों वर्ष पूर्व की सभ्यता हो तुम I तुम्हारे यहाँ पे सतयुग हैं, द्वापर युग हैं, त्रेतायुग हैं I तुम्हारे यहाँ चतुर युग है, कलयुग हैं I नहीं तुम्हारी अपनी चीज़ें जो हैं न, उसे तुम श्रेष्ठतम मानोगे ही सही, उसे बढ़ा-चढ़ा कर बताओगे ही सही, लेकिन हम करेंगे सही-सही डेटिंग, हम करेंगे I तुम मत करों I

इसीलिए उन्होंने पूरी की पूरी शिक्षा व्यवस्था जो थी उसमे हमारे अवतार, हमारे ऋषियों को, मुनियों को, हमारे शास्त्रों को सब को रिजेक्ट कर दिया I उसको दन्त कथा, कपोल कल्पना बता दिया और साथ ही साथ डेटिंग जो थी, शंकराचार्य, भगवान् की, उसको भी बदल दिया इन्होने I कहाँ इनकी विचारधारा का स्त्रोत जो हैं उसको विकृत, दूषित और प्रदूषित करना पड़ेगा, तभी यह लोग ideologically हारेंगे I War strategy जो होती हैं न, वोह एक तरह की नहीं नहीं होती हैं, कई तरेह के war होतें हैं I Weponary war भी होते हैं, शस्त्र युद्द भी होते हैं, वैचारिक युद्द भी होते हैं, ideological war भी होते हैं, cultural war भी होते हैं I तो अंग्रेजों ने हमारे साथ सब तरेह से खेला I Ideologically भी खेले वो हमारे साथ, हमारे साथ culturally भी खेलते रहें वो I Culturally भी हमे damage करना चाहा और persecutions, genocides, massacres, और assassinations तो किये ही सही I जलिअवाला बाघ जिसका उदहारण हैं I इसीलिए उन्होंने हमे पूरी तरह से damage करने की कोशिश करी I

अब हमारे यहाँ के इतिहासकारों का यह दायित्व बनता हैं कि वोह लोग अंग्रेजों के दिए हुए इस इतिहास को क्यों धो रहें हैं ? क्या बहुत reliable, authentic लोग थे क्या अँगरेज़? क्या बहुत भला चाहते थे हमारा ? क्या वोह हमारा भला करने आये थे वोह ? नहीं, वोह तो हमारा दमन, शोषण, अत्याचार करने आये थे, तो ऐसे लोग, क्या हमारे इतिहास के साथ न्याय करेंगे ? हो ही नहीं सकता हैं I लेकिन फिर भी, उस इतिहास का, उस विकृत इतिहास का शोधन नहीं किया जा रहा हैं I Indus Valley civilization I Harappa, Mohenjo Daro की बातें करने लागतें हैं, और फिर बतातें हैं कि aryan invasion हुआ भारत में i अरे भाई, aryan invasion हुआ भारत में, तो राम सेतु मिल गया प्रमाण I

अच्छा अंग्रेजों की जो यह टाइम लाइन है न, जो उन्होंने दी हैं, इसका सबसे बड़ा fault जो हैं, वोह आपको बतातें है आज I आपकी जानकारी में है वोह बात. लेकिन हम बताते हैं I इनका कहना यह हैं कि महाभारत जो थी, वोह ४०० BC तक लिख दी गयी थी I उसके बात में यह बतातें हैं कि उसके बाद पतंजलि योग सूत्र लिखे गए I तो आपको जानकारी हैं कि नहीं कि हमारे शास्त्रों की जानकारी हम देंगे या आप देंगे हुमको ? अरे भई भगवन भाद्रयाण, महर्षि वेदव्यास ने, महर्षि पतंजल कृत योग सूत्र पर भाष्य लिखा हैं I ब्रह्मसूत्र तो दिया ही भाद्रयाण महर्षि वेदव्यास ने, भगवन ने, लेकिन साथ ही साथ उन्होंने महर्षि पतंजलि के योग सूत्र पे भाष्य लिखा हैं, भगवन वेदव्यास ने I और वेदव्यास जी के भाष्य के ऊपर शंकराचार्य ने विवरण लिखा हैं I

तो ऐसा तो नहीं हो सकता, कि भगवन वेदव्यास पहले आके भाष्य लिखे देतें हैं, उसके बाद में पतंजलि आतें हैं और योसुत्र देतें हैं वोह I  यह तो हो ही नहीं सकता हैं I यानि पतंजलि पहले आये और बाद में बागवान वेदव्यास आये हैं I  तभी तो भगवान वेदव्यास जी का भाष्य आया और उसपर भगवन शंकराचार्य जी ने विवरण लिखा I तो इस तरह के, इनकी जो exposures होतें हैं न फिर, कई चीज़ें सामने आती हैं, कि हा यह लोग हमारा बुरा करना चाहते थे I इन्होने हमारे इतिहास के साथ बहुत छेड़छाड़ करी है I और हमको उस इतिहास का शोधन करना चाहिए I विकृत ज्ञान-विज्ञान का सुधार करना चाहिए हमे I हम कब तक इनका दिया इतिहास धोतें रहेंगे ?

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